Khamoshi Ka Guldaan

Khamoshi Ka Guldaan

Sunday, June 1, 2014

Narendra Bhai Modi in Different Shapes & Moods














~!!~ Pesh-e-Khidmat Hai ~!!~



~!!~ Mulaahija Farmaiye ~!!~



!! <> खुद तख्लीक़ ग़ज़ल <> !! <> 

कितना प्यारा मंज़र है
मैं हूँ , चाक समंदर है

आँखों से वो ग़ायब क्यों 
धरती के जो अन्दर है 

उसके धन की चर्चा इतना 
जैसे कोई समंदर है 

अभी गाँव से आया हूँ 
बचपन का सारा मंज़र है 


जुदा हुए तो अरसा बीता 
यादों का एक समंदर है 

उसकी गली से गुज़रा हूँ 
यादो का एक समंदर है 

सुर बदला पर ताल नहीं 
सियासत का यही हुनर है 

ऊँट की चोरी चुपके चुपके 
ज़रूर ये कोई लीडर है 

ख़त उसके सब जला दिए 
यादों का एक समंदर है

मैं हूँ एक सफीना जिसमें 
उसकी यादों का लंगर है 

सुयश साहू
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<>!!<> मैं क्यों परेशान हूँ <>!!<>

<>!!<> मैं क्यों परेशान हूँ <>!!<>


हाँमैं मुसलमान हूँ
खुद अपनी पहचान हूँ
दलील हूँ, बुरहान हूँ
क़ौम का  ऐलान हूँ

मैं क्यों परेशान हूँ
मैं क्यों परेशान हूँ

मैं सलाहुद्दीन हूँ
"इत्तेहादुल मुसलमीन" हूँ
मैं शाही इमाम हूँ
गो कि बहुत बनाम हूँ

मैं सेत सुलेमान हूँ 
मैं क्यों परेशान हूँ
मैं क्यों परेशान हूँ
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बुरहान = तर्क,प्रमाण। सलाहुद्दीन = अकबरुद्दीन ओवैसी का खडूस ताऊ।
इत्तेहादुल मुसलमीन = हैदराबाद की "देश विरोधी" एक सियासी जमात।
सेत सुलेमान = Muslim League - Keral का एक कट्टरवादी नेता।